|| हनुमान चालीसा को एक ही दिन में सिद्ध करने की पूर्ण एवं सरल विधि ||

॥ हनुमान चालीसा को एक ही दिन में सिद्ध करने की पूर्ण एवं सरल विधि ॥

Hanuman Chalisa Ko Ek Hi Din Mein Siddh Karne Ki Vidhi
🚩 श्री हनुमते नमः 🚩
हनुमान चालीसा को एक ही दिन में सिद्ध करने की पूर्ण एवं सरल विधि

कलियुग में सभी पापों का नाश करने वाले और सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाले हनुमान चालीसा का पाठ वैसे तो सभी भक्त अपने घर पर करते हैं, किंतु क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा को भी सिद्ध किया जा सकता है? वैसे तो सभी हनुमान भक्त अपने घर पर ही प्रेमभाव से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, किंतु यदि आप हनुमान चालीसा से पूर्ण फल की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो आपको हनुमान चालीसा को सिद्ध करना होगा।

श्रीराम भक्त हनुमान जी वैसे तो थोड़ी-सी पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं, किंतु इनकी पूजा में विशेष रूप से पवित्रता का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। यदि आप हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी कोई भी साधना करते हैं, तो ब्रह्मचर्य का पालन करना सबसे प्राथमिक हो जाता है। आज हम आपको हनुमान चालीसा को एक ही दिन में सिद्ध करने की विधि के विषय में जानकारी देने वाले हैं।

वैसे तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहती है, किंतु यदि आप हनुमान चालीसा को सिद्ध कर लेते हैं, तो इसकी फल-प्राप्ति आपको पूरे जीवन भर मिलती रहेगी।

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🚩 हनुमान चालीसा को सिद्ध करने की विधि 🚩

आप मंगलवार के दिन सुबह 7 बजे से पहले हनुमान चालीसा के पाठ की विधि शुरू कर दें। ध्यान दें कि सुबह 7 बजे से पहले ही यह कार्य शुरू करना है, क्योंकि इसके बाद राहुकाल शुरू हो जाता है। राहुकाल में किसी भी कार्य को नहीं करना चाहिए, ऐसा माना जाता है कि इससे कार्य का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

एक चौकी स्थापित करके उस पर हनुमान जी की प्रतिमा रख दें। चौकी के दाहिनी ओर मिट्टी के एक कलश को पानी से भरकर रख दें। एक ऐसा नारियल लें जिसमें पानी न हो और जिसे हिलाने पर आवाज आती हो। इस नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर उसे लाल धागे से बाँध दें। अब इस नारियल और लाल कपड़े को मिट्टी के कलश के ऊपर स्थापित कर दें।

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▶ हनुमान चालीसा को एक ही दिन में कैसे सिद्ध करें?

इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा के दाहिनी ओर, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, मिट्टी के एक दीपक में दीपक जला लें। हनुमान जी की प्रतिमा के आगे गणेश जी की स्थापना करें। गणेश जी की स्थापना के लिए मिट्टी की एक छोटी-सी डली लें या किसी सुपारी पर मौली लपेट दें और उसे हनुमान जी की प्रतिमा के सामने स्थापित करें।

हनुमान जी की प्रतिमा के आगे थोड़े-से चावल रख दें। ये चावल पितृ देव के लिए होते हैं। एक प्लेट में थोड़ी-सी रोली (कुमकुम), चावल और थोड़ा-सा मीठा, जैसे चीनी या मिश्री के दाने, रख लें। एक लोटे में पानी भर लें और थोड़ी-सी दूब घास भी साथ में रख लें।

इस प्रकार मंगलवार को सुबह 7 बजे से पहले इस तरह की व्यवस्था करके रख लें।

अब सबसे पहले लोटे के जल में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर दूब घास से सभी दिशाओं में पानी के छींटे लगा दें। छींटे लगाते समय मुख से यह बोलें:

“हे प्रभु! मैं अपनी सभी दिशाओं को पवित्र करता हूँ।”

अब पृथ्वी को हाथ से छूकर उस हाथ को अपने माथे पर तीन बार लगाएँ और बोलें:

“ॐ आधार भूमे नमः, कर्म भूमे नमः, जन्म भूमे नमः।”

अब लोटे में से एक चम्मच जल अपने हाथ में लेकर पी जाएँ और पीते समय बोलें:

“ॐ नारायणाय नमः।”

अब दोबारा एक चम्मच जल पी जाएँ और बोलें:

“ॐ केशवाय नमः।”

अब एक बार और एक चम्मच जल पी जाएँ और बोलें:

“ॐ गोविन्दाय नमः।”

इसके बाद हाथ में थोड़ा-सा जल लेकर हाथ धो लें।

अब इस प्रकार कहते हुए गणेश जी का आवाहन करें:

“हे श्री गणेश! आप आइए और अपने स्थान पर विराजमान हो जाइए।”

अब मिट्टी के कलश की ओर हाथ करते हुए बोलें:

“हे वरुण देव! आइए और अपना स्थान ग्रहण कीजिए।”

हनुमान जी की प्रतिमा के आगे जो चावल रखे थे, वह पितृ देव का स्थान है। अब अपने हाथ से उन चावलों की ओर संकेत करते हुए बोलें:

“हे पितृ देव! आइए और अपना स्थान ग्रहण कीजिए।”

अब यदि आपने कोई गुरु बना रखा है, तो उनका आवाहन करें। यदि गुरु नहीं हैं, तो भगवान शिव को गुरु मानकर उनका आवाहन करें:

“हे गुरुदेव! आइए और अपना स्थान ग्रहण कीजिए।”

अब प्रधान देवता हनुमान जी का आवाहन करें:

“हे हनुमान जी! आप आइए और अपना स्थान ग्रहण कीजिए।”

इसके बाद इस मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

अब गणेश जी, पितृ देव, वरुण देव और हनुमान जी, जिनकी स्थापना हम कर चुके हैं, उन सभी को थोड़े-थोड़े चावल अर्पित करें और कुमकुम से तिलक करें। तिलक करने के बाद भी थोड़े-थोड़े चावल अर्पित करें।

अब चीनी या मिश्री के दानों से सभी देवताओं को भोग लगाएँ। यदि आपके पास पुष्प हैं, तो वे भी सभी को अर्पित करें। फल उपलब्ध हों, तो वे भी सभी को अर्पित करें।

🙏 संकल्प लेने की विधि 🙏

अब हथेली में थोड़े-से चावल लेकर संकल्प लें। संकल्प में आपको यह बोलना है:

“हे परमपिता परमेश्वर! मैं (अपना नाम और अपना गोत्र बोलें) हनुमान जी महाराज की हनुमान चालीसा को सिद्ध करना चाहता हूँ। हे परमपिता परमेश्वर! आप मेरे कार्य में पूर्णता प्रदान करें और यदि मुझसे कोई गलती हो, तो मुझे क्षमा करें।”

ऐसा कहते हुए हथेली में रखे चावलों को गणेश जी पर छोड़ दें।

अब हनुमान चालीसा को हाथ में लेकर उसे नमन करें और इस मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्मताम्॥

अब हनुमान चालीसा को नमन करें और उस पर तिलक कर दें।

📿 हनुमान चालीसा के 121 पाठ करने की विधि 📿

इसके बाद आपको हनुमान चालीसा का पाठ 121 बार करना है। आप हनुमान चालीसा को पहले ही कंठस्थ अर्थात् याद कर लें, इससे आपके 121 पाठ थोड़े जल्दी पूरे हो जाएँगे।

एक बात का ध्यान रखें कि आपको यह पाठ सुबह 7 बजे से पहले शुरू करके दोपहर 3 बजे से पहले समाप्त करना है, क्योंकि 3 बजे के बाद फिर से राहुकाल शुरू हो जाता है।

यह आवश्यक नहीं है कि आप 121 पाठ लगातार ही करें। यदि बीच-बीच में आपको थकान महसूस हो, तो आप उठ सकते हैं। किंतु आसन छोड़ने से पहले आपको इस प्रकार करना है:

हथेली में थोड़ा-सा जल लेकर बोलें:

“हे परमपिता परमेश्वर! मैंने हनुमान चालीसा की सिद्धि के लिए जो पाठ किए हैं, उन्हें मैं श्री ब्रह्म को अर्पित करता हूँ।”

इसके बाद जल को नीचे जमीन पर छोड़ते हुए तीन बार बोलें:

ॐ विष्णवे नमः।
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ विष्णवे नमः।

अब आप अपना आसन थोड़ा-सा मोड़कर उठ सकते हैं।

अब लगभग 15 या 20 मिनट बाद जब भी आप दोबारा बैठें, तो आपको किसी भी विधि को फिर से करने की आवश्यकता नहीं है। बस संकल्प लेकर पाठ शुरू कर दें।

संकल्प के लिए हाथ में चावल लेते हुए इस प्रकार बोलें:

“हे परमपिता परमेश्वर! मैं (अपना नाम और गोत्र बोलें) हनुमान जी महाराज की हनुमान चालीसा को सिद्ध करना चाहता हूँ। आप मेरे कार्य में पूर्णता प्रदान करें और यदि मुझसे कोई गलती हो गई हो, तो मुझे क्षमा करें।”

अब चावलों को गणेश जी पर छोड़ दें।

इस प्रकार जब भी आप पाठ करने के लिए बैठें, तो इसी तरह संकल्प लेकर शुरुआत करें। और जब भी आसन से उठें, तो इसी प्रकार संकल्प के माध्यम से अपने पाठ श्री ब्रह्म को अर्पित करके उठें।

🚩 जय श्री राम जाप और हनुमान चालीसा पाठ 🚩

अब आपको बताते हैं कि हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करना है।

21 बार “जय श्री राम” बोलकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू करें। जैसे ही पाठ पूरा हो जाए, फिर से 21 बार “जय श्री राम” बोलें।

इस प्रकार प्रत्येक पाठ के आरंभ में और अंत में 21 बार “जय श्री राम” का जाप करें और मन लगाकर अपने 121 पाठ पूरे करें।

अपने पाठ पूरे करने के बाद हनुमान जी की आरती करें। इस प्रकार हनुमान चालीसा सिद्ध हो जाती है।

हनुमान चालीसा सिद्ध होने के बाद आप किसी भी स्थान पर, किसी भी कार्य को करते समय या कार्य शुरू करने से पहले मन ही मन इसका पाठ कर सकते हैं और फिर चमत्कार देख सकते हैं। यदि आप किसी भय से परेशान हैं, तो इस पाठ को अवश्य सिद्ध करें। ऐसा माना जाता है कि इससे आपको कभी भय नहीं लगेगा।

🎬 हनुमान चालीसा सिद्धि वीडियो

हनुमान चालीसा को एक ही दिन में कैसे सिद्ध करें?

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॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥
🚩 जय श्री राम 🚩

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