भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाओं की गिरफ्त से बचने के सरल उपाय

भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाओं की गिरफ्त से बचने के सरल उपाय
॥ शिव शक्ति सेवा धाम — तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र, दिल्ली ॥
भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाओं की गिरफ्त से बचने के सरल उपाय

भूत-प्रेत और मृत्यु के बाद प्राप्त होने वाली सजाओं के विषय में गरुड़ पुराण में विस्तार से विवरण मिलता है। हिंदू धर्म के अनुसार, जातक मृत्यु के पश्चात् कुछ समय के लिए भूत योनि, प्रेत योनि व पितृ योनि को प्राप्त होता है। जो जातक असमय मृत्यु को प्राप्त होते हैं और उनके परिवारजन उनकी आत्मा की शांति के लिए क्रियाएँ नहीं करवाते हैं, वे भूत-प्रेत योनि में विचरण करते हैं व अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए पृथ्वी पर ही विचरण करते हैं।

भूत-प्रेत किन लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं?

यद्यपि भूत-प्रेत एक अदृश्य ऊर्जा के रूप में इसी संसार में रहते हैं, किंतु इनके आसपास होने का अहसास कुछ ही लोगों को हो पाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, जिन जातकों के गण कमजोर होते हैं, वे ही भूत-प्रेत जैसी नकारात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं व शीघ्र ही इनके प्रभाव में भी आ जाते हैं। इसके अतिरिक्त कभी-कभी शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति, बीमार व्यक्ति, मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति और गर्भवती महिलाएँ भी भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाओं की गिरफ्त में आ सकती हैं।

॥ भूत-प्रेत से मुक्ति ॥

भूत-प्रेत भगाने के उपाय

भूत-प्रेत आदि एक बार जिस व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं, तो बड़ी ही मुश्किल से उसका पीछा छोड़ते हैं। ऐसा रोगी हर दिन जीवन से संघर्ष करता है। भूत-प्रेत को दूर भगाने के लिए तरह-तरह के उपाय करता है, सिद्ध स्थानों की तलाश करता है, झाड़-फूँक व तांत्रिकों के पास जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे सरल उपाय बताने जा रहे हैं जिनके प्रयोग से भूत-प्रेत दूर भागने लगते हैं।

  • पाँच मुखी रुद्राक्ष की विधिवत पूजा करें व सावन माह, शिवरात्रि या सोमवार के दिन धारण करें। रोजाना रुद्राक्ष की पूजा करें, इसे धूप-दीप दिखाएँ व “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के 108 जप करें। रुद्राक्ष धारण करने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं। पाँच मुखी रुद्राक्ष के तीन मनके धारण करने से पूर्ण लाभ मिलता है। इसके साथ ही रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक मनोबल भी मजबूत होता है।
  • जिन लोगों पर भूत-प्रेत का प्रभाव शीघ्र होने लगता है, उन्हें हनुमान चालीसा या बजरंग बाण को सिद्ध अवश्य करना चाहिए। हनुमान चालीसा व बजरंग बाण को एक ही दिन में सिद्ध कैसे करते हैं, इसके लिए आप यह पोस्ट पढ़ें:
🚩 हनुमान चालीसा को एक ही दिन में सिद्ध करें 🚩
  • हनुमान जी, माँ काली व भैरव की आराधना करने वाले जातक से भूत-प्रेत आदि स्वतः ही दूर होने लगते हैं।
  • हनुमान जी का ऐसा मंदिर जहाँ हनुमान जी की प्रतिमा को सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता हो, वहाँ सुबह-सुबह रोजाना जाएँ व हनुमान जी के चरणों से सिंदूर लेकर तिलक करें। साथ ही “जय श्री राम” नाम का जप करें। समय-समय पर हनुमान जी को चोला चढ़ाएँ व मंगलवार को व्रत रखें।
  • घर में सुबह-शाम धूप-दीप अवश्य लगाएँ व मंगलवार और शनिवार को घर में गुग्गुल व लोबान की धूनी दें।
  • घर में समय-समय पर सुंदरकांड का पाठ करते रहें व किसी जानकार पंडित द्वारा हवन आदि भी कराते रहें।

भूत-प्रेत के प्रभाव से बचने के लिए ये सावधानियाँ जरूर अपनाएँ

  • शाम के समय घर से बाहर निकलते समय मीठा खाकर न निकलें। विशेष रूप से सफेद मीठी वस्तुएँ तो भूलकर भी खाकर बाहर न जाएँ।
  • हाथों में या बालों में मेहँदी लगाकर घर से बाहर न जाएँ।
  • होली, दिवाली के त्योहार पर रात्रि को सुनसान चौराहे पर कदापि न जाएँ। इस दिन बहुत-सी तांत्रिक गतिविधियाँ व टोटके किए जाते हैं।
  • भूत-प्रेत आदि की कहानियों में अधिक रुचि न लें व जितना हो सके इनके नाम से भी दूर रहें।
  • शाम के समय तेज गंध वाले परफ्यूम आदि लगाकर घर से बाहर न निकलें।
  • ऐसे स्थानों से दूर रहें जहाँ कोई तांत्रिक अनुष्ठान आदि किए जाते हों।
  • किसी चौराहे आदि पर यदि कोई टोटका आपको दिखाई दे, तो चुपचाप उसे अनदेखा करके निकल जाएँ। टोने-टोटकों को कभी भी स्पर्श न करें व अपने पैर के नीचे न आने दें। यदि आपको दिखाई दे कि आपके सामने ही कोई व्यक्ति चौराहे पर टोटका करके जा रहा है, तो आप उस चौराहे को तब तक पार न करें जब तक कि कोई अन्य व्यक्ति उस चौराहे को पार न कर ले।

भूत-प्रेत और सभी नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने में ये सभी उपरोक्त उपाय प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। इन्हें अपनाएँ और भूत-प्रेत आदि की गिरफ्त में आने से बचें। ये सभी उपरोक्त उपाय सामान्य स्थिति में तो प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं, किंतु यदि समस्या गंभीर हो जाए, तो रोगी को पास के किसी सिद्ध स्थान आदि का सहारा लेना चाहिए।

⚠️ आवश्यक सूचना

सभी तांत्रिक क्रियाएँ व साधनाएँ सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से दी गई हैं। गुरु के मार्गदर्शन में ही कोई साधना व तंत्र क्रिया करें, अन्यथा आप पर विपरीत प्रभाव भी हो सकता है। किसी के ऊपर दुरुपयोग न करें एवं साधना में त्रुटि से होने वाली किसी भी क्षति व हानि के उत्तरदायी आप स्वयं होंगे। शिव शक्ति सेवा धाम तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।

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