दिव्य दृष्टि साधना - शक्ति प्राप्त करने का प्रयोग


दिव्य दृष्टि साधना - शक्ति प्राप्त करने का प्रयोग

सभी नए और पुराने साधकों के लिए जै जै सीता राम।

मित्रों, वैसे तो बहुत सारे तरीकों द्वारा दिव्य दृष्टि की प्राप्ति होती है। कुछ देर तक दृष्टि चलती भी है, लेकिन कई बार ऐसे अवसर आ जाते हैं कि ईर्ष्यावश कोई दूसरा तांत्रिक आपकी दिव्य दृष्टि को बाँध देता है।

फिर आपकी सभी शक्तियाँ अपने आप से ओझल हो जाती हैं। आज इस लेख में आपकी इस समस्या का निदान करूँगा, इस समस्या का निराकरण करूँगा और आपको बताऊँगा कि एक साधक के पास दिव्य दृष्टि का होना कितना जरूरी है, साधक चाहे नया हो या पुराना।

दिव्य दृष्टि की शक्ति उन्हीं साधकों को प्राप्त होती है, जिनका ज्यादा झुकाव रूहानियत की तरफ होता है। इस शक्ति को प्राप्त कर लेना आसान है, लेकिन इस शक्ति को अपने पास टिकाकर रखना आसान नहीं है।

एक साधक होने के नाते मुझे दो चीजें बहुत बुरी लगती हैं—एक ट्रांसफर, दूसरा शक्तिपात। ये दो बातें साधक को पथभ्रष्ट कर देती हैं। जो लोग इन दो बातों के पीछे लगे रहते हैं, वास्तव में उन्हें साधना से कुछ लेना-देना नहीं होता, बल्कि स्ट्रीट फूड की तरह सब कुछ पाना चाहते हैं।

हालाँकि ये बातें सत्य पर आधारित हैं, फिर भी उस स्तर के आमिल और योगी लोग बहुत कम ही हैं और मैं तो यही बोलूँगा कि ना के बराबर ही हैं। किसी की हानि करके और किसी के भविष्य को बिगाड़ देने वाले आदमी को भी साधक नहीं कहा जा सकता।

ये वो बातें हैं जैसे नागमणि, गजमुक्ता, बाँसमुक्ता इत्यादि। ये चीजें वास्तविक रूप से हैं तो सही, लेकिन गूलर के फूल की तरह, जो कि बहुत अधिक परिश्रम और अपना सब कुछ खोकर ही प्राप्त होती हैं। और जब वो प्राप्त होती हैं, तो आदमी के पास अपना कुछ नहीं बचता।


किसी ने सच ही बोला है कि,

"प्रेम गली अति सांकरी ता में दो ना समाय,
जब मैं था तब हरि नहीं, हरि है तब मैं नाय।"


दिव्य दृष्टि प्राप्त करने के विभिन्न तरीके

दिव्य दृष्टि बहुत सारे तरीकों से प्राप्त होती है। उनमें से मुख्य हैं—देवी-देवता, भूत-पिशाच की साधना द्वारा, योग साधना द्वारा, त्राटक के अभ्यास से या ध्यान लगाने से शक्ति प्राप्त हो जाती है।

और प्राप्ति होना ही सब कुछ नहीं। उसके बाद भी उस सिद्धि के प्रभाव को चालू रखने के लिए अभ्यास या नित्य प्रति जाप की आवश्यकता होती है। ऐसा नहीं कि एक बार ही शक्ति प्राप्त कर ली और हो गया।

○ देवी या देवता द्वारा प्राप्त दिव्य दृष्टि: देवी या देवता द्वारा प्राप्त हुई दिव्य दृष्टि की शक्ति चिरस्थायी और बहुत ही अधिक शक्तिशाली और प्रभावी होती है। इसमें साधक भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल के बारे में याचक को 100% बिल्कुल सही बता सकता है। लेकिन इसे प्राप्त करने में बहुत ज्यादा समय लगता है।

○ पिशाच या पिशाचिनी द्वारा साधना: पिशाच या पिशाचिनी द्वारा ये साधनाएँ मुख्य रूप से रजो और तमोगुण प्रधान होती हैं और कुछ समय के परिश्रम के बाद ही साधक को सिद्धि मिल जाती है। इसमें इनकी श्रेणी के हिसाब से फल प्राप्त होता है।

○ भूत-प्रेत संबंधी मान्यताएँ: भूत-प्रेत हमें यह श्रेणी पढ़ने-सुनने में निम्न स्तरीय आभास देती है, लेकिन ऐसा है नहीं। जिन परियाँ, साधु-संत और अघोरी इत्यादि भी इसी श्रेणी में ही आते हैं।

जिस आत्मा को मारने के बाद मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ, जो आत्मा अतृप्त रह गई और अपने पूर्व जीवन के संकल्प को नहीं त्याग सकी, उस आत्मा को मैं निजी तौर पर प्रेत की योनि की ही संज्ञा दूँगा।

○ ऊपरी योनि की आत्मा संबंधी मान्यता: किसी-किसी व्यक्ति को कोई दूसरी ऊपरी योनि की आत्मा ग्रस्त कर लेती है और जीवन भर नहीं छोड़ती। उन व्यक्तियों को बिना साधना के भी दृष्टि प्राप्त हो जाती है और वो परालौकिक घटनाओं को देख सकते हैं।

लेकिन इसमें एक नकारात्मक आयाम भी है। ऐसे व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत कुछ खोना पड़ता है। इस ब्रह्मांड में हर एक वस्तु की कोई न कोई कीमत है, वो तो देनी ही पड़ेगी।

○ त्राटक का अभ्यास: त्राटक भी इनमें से एक बहुत अच्छा साधन है, जिससे साधक को चिरस्थायी दिव्य दृष्टि और सम्मोहन शक्ति की प्राप्ति होती है। लेकिन त्राटक का अभ्यास करने के लिए आपको मार्गदर्शन के लिए किसी विशेषज्ञ की आवश्यकता पड़ती है। बिना गुरु के अभ्यास करने से आँखों की रोशनी भी जा सकती है।

○ मुद्रा, ध्यान योग एवं रेकी: मुद्रा और ध्यान योग एवं रेकी का अभ्यास करने से भी दिव्य दृष्टि शक्ति प्राप्त हो जाती है, लेकिन इसमें समय लगता है और बिना योग्य शिक्षक के मार्गदर्शन के ये सभी साधनाएँ और अभ्यास कामयाब नहीं होते।


दिव्य दृष्टि शक्ति प्राप्त करने का प्रयोग

आज एक साधारण-से प्रयोग से आपको दिव्य दृष्टि की शक्ति प्राप्त करने का तरीका बताने जा रहा हूँ।

○ ये साधना रात्रि 10:30 बजे के बाद सुबह भोर तक की जा सकती है और इसे करने में कोई भय भी नहीं है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

○ घर के एकांत कमरे में एक ऐसे स्थान का चुनाव करें, जहाँ साधना करते समय आपको कोई परेशानी न हो। साथ ही उस समय आपको कोई बुलाए या कोई और ध्वनि आपके कानों में ना जाए।

○ शुभ मुहूर्त में पूर्वाभिमुख होकर घर के एक एकांत कोने में एक आम की पटरी, जो बनने के बाद धोकर सुखा ली गई हो, स्थापित करें। उस पर लाल रंग का सवा मीटर कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा जी का एक चित्र स्थापित करें और कलश स्थापित कर दें।

माँ के चित्र के सामने संकल्प लें और धूप, दीप, फल, पुष्प इत्यादि अर्पित करें। तदुपरांत नैवेद्य में बेसन के लड्डू का भोग लगाएँ। एक जल का पात्र पास में रख लें। जाप के अंत में वो जल आपको पीना है।

○ लाल चंदन, रुद्राक्ष या लाल हकीक की 108 दानों की माला लें। फिर गुरु के चरणों का ध्यान करें और गुरु मंत्र का जाप करें। उसके उपरांत श्री गणेश जी और श्री गौरी की सामान्य पूजा करें और 5 माला ॐ गं गणपते नमः का जाप करें।

फिर आपको एक ही बैठक में "ॐ ह्रोम नमः शिवाय" का 51 माला नित्य प्रति जाप करना है।

और निम्न मंत्र का 5 माला जाप करना है।

दृष्टि पिशाच मंत्र

मंत्र:

"कोट कोट पे खेले डाल डाल पर झूले ताल ताल को सुखाये भूत भविष्य को बताए तीर पे तीर चलाये चलाये के पूर्व जन्म को ना बताये तो दृष्टि पिसाच ना कहाये बंद खुली आँखन से बताये सही गाँव संवत जाट धर्म गैल को नेत्रन से न बताये तो अपनी माँ की सैय्या तोड़े वा के चीर पे चोट करे आन कालिका की बंदगी महाकाल शंकर की मेरी भगती गुरु की शक्ति मन्त्र साँचा फूलो मन्त्र ईश्वरी वांचा"।।

ये दृष्टि पिशाच का मंत्र बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, एक बार अगर इससे आपकी नजर या दिव्य दृष्टि खुल जाती है, तो दोबारा बंद नहीं होगी। इस मंत्र की शक्ति कर्णपिशाचिनी के मंत्र के बराबर बताई जाती है, लेकिन कर्णपिशाचिनी की साधना में आने वाले खतरों जैसे खतरे इसमें नहीं आते।

कुछ ही दिनों में आपके सपनों में और आँखें बंद करने के बाद आपको बहुत सारे सर्पों और साधुओं के दर्शन होंगे। साथ ही बहुत सारी विचित्र अनुभूतियाँ होंगी, जो कि बहुत विस्मयकारी होंगी।

जाप के समय आपकी दोनों भौहों के बीच स्पंदन या खिंचाव महसूस होगा। आपके ध्यान में जाते ही आपके सामने चलचित्र की तरह आकृतियाँ आने लगेंगी।

आप इतने सक्षम हो जाएंगे कि कोई भी आदमी या इतर योनि का जीव भी आपसे कुछ छिपा नहीं पाएगा। आप जिस भी वस्तु या प्राणी का ध्यान करेंगे, वो आँखें बंद करके ध्यान में जाते ही वास्तविक रूप से आपके सामने आ जाएगा।

साधना के अन्य नियम

○ सोमवार को शिव उपासना करें और व्रत धारण करें। त्रयोदशी का व्रत बिना नागा किए धारण करें।

○ सभी साधना-विषयक नियमों का सख्ती से पालन करें।

○ यह याद रखो कि आपको साधना के समय या वैसे भी कब्ज की शिकायत ना हो। अगर है, तो पहले उसकी प्राकृतिक चिकित्सा करवाएँ।

○ बीज मंत्र की और शास्त्रीय साधना करते हुए शुद्ध उच्चारण, भूतशुद्धि, न्यास और जितनी भी शास्त्रीय मर्यादाएँ हैं, उनका पालन करें।

○ शाबर मंत्रों की साधना के समय नवनाथों और शिवस्वरूप भगवान श्री गुरु गोरक्षनाथ जी की साधना जरूर करें।

साधकों के लिए विशेष संदेश

मैंने अपनी तरफ से इस लेख में कोई कमी नहीं छोड़ी और यह साधना मेरी अनुभूत है, कभी भी खाली नहीं जाती।

फिर इस साधना को अपने गुरुदेव के निर्देशन में ही करें। अपने आप अपने मन को गुरु बनाकर इस साधना को करने का प्रयास करने की बुद्धिमानी ना करें, अन्यथा विपरीत परिणामों का रसास्वादन करना होगा।

इसमें बहुत-सी बारीकियाँ हैं, इसलिए किसी विशेषज्ञ के निर्देशन में ही करें।

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शिव शक्ति सेवा धाम
तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र, दिल्ली

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⚠️ आवश्यक सूचना: सभी तांत्रिक क्रियाएँ व साधनाएं सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से दी गई हैं, गुरु के मार्गदर्शन मे ही कोई साधना व तंत्र क्रिया करें अन्यथा आप पर विपरीत प्रभाव भी हो सकता है। किसी के ऊपर दुरुपयोग न करें एवं साधना मे त्रुटि से होने वाले किसी भी क्षति व हानि के उत्तरदायी आप स्वयं होंगे, शिव शक्ति सेवा धाम तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।

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