श्री बगला प्रत्यङ्गिरा कवचम्
दिव्य शक्ति • आध्यात्मिक संरक्षण • मंत्र स्तोत्र
॥ जय माँ भगवती ॥ हर हर महादेव ॥
॥ परिचय ॥
श्री बगला प्रत्यङ्गिरा कवचम् शक्ति-साधना से संबंधित एक स्तोत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। दिए गए पाठ में माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यङ्गिरा की शक्तियों का वर्णन है। इस लेख में कवच का परिचय, अष्ट शक्ति मंत्र, फलश्रुति और पाठ-विधि संकलित हैं।
बगलामुखी: धार्मिक परंपरा में माँ बगलामुखी को स्तम्भन शक्ति से संबद्ध माना जाता है।
प्रत्यङ्गिरा: माँ प्रत्यङ्गिरा को उग्र शक्ति और संरक्षण से संबंधित देवी के रूप में पूजा जाता है।
भक्त इस प्रकार के स्तोत्र का पाठ श्रद्धा, आत्मसंयम और आध्यात्मिक शांति के उद्देश्य से करते हैं। किसी धार्मिक पाठ से अदालत के निर्णय, किसी अन्य व्यक्ति के व्यवहार या किसी कथित तांत्रिक प्रभाव के बारे में निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती।
॥ आठ योगिनी शक्तियाँ ॥
१. भ्रामिणी
दिए गए विवरण में भ्रामिणी को भ्रम से संबंधित शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।
२. स्तम्भिनी
स्तम्भिनी को स्तम्भन और स्थिरता से संबंधित शक्ति के रूप में बताया गया है।
३. क्षोभिणी
क्षोभिणी का वर्णन क्षोभ और उथल-पुथल से संबंधित शक्ति के रूप में किया गया है।
४. मोहिनी
मोहिनी को मोह से संबंधित शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।
५. संहारिणी
संहारिणी का संबंध संहार और नकारात्मकता के अंत की धार्मिक अवधारणा से है।
६. द्राविणी
द्राविणी को द्रावण या दूर करने की शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।
७. जृम्भिणी
जृम्भिणी का वर्णन जृम्भा और शिथिलता से संबंधित शक्ति के रूप में किया गया है।
८. रौद्री
रौद्री को उग्र और रौद्र स्वरूप वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
॥ पाठ विधि ॥
- शुभ समय: अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार सुविधाजनक समय चुनें।
- वस्त्र और आसन: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और साफ आसन पर बैठें।
- दिशा: अपनी परंपरा के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ सकते हैं।
- पूजा सामग्री: चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर देवी का चित्र स्थापित करें। दीपक जलाते समय अग्नि-सुरक्षा का ध्यान रखें।
- नैवेद्य: अपनी परंपरा के अनुसार फल या मिठाई अर्पित कर सकते हैं।
- प्रार्थना: पाठ से पहले शांत मन से देवी का स्मरण करें।
- पाठ: मंत्रों का उच्चारण सावधानी से करें। पाठ के अर्थ और परंपरा को समझने के लिए योग्य विद्वान से मार्गदर्शन लें।
॥ श्री बगला प्रत्यङ्गिरा कवचम् ॥
॥ ॐ ॥
विनियोगः
अस्य श्री बगला प्रत्यङ्गिरा मन्त्रस्य नारद ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, प्रत्यङ्गिरा देवता, ह्लीं बीजं, हूं शक्तिः, ह्रीं कीलकं, मम शत्रुनाशने विनियोगः ॥
॥ मन्त्रः ॥
॥ कवचम् ॥
संहारिणी द्राविणी च जृम्भिणी रौद्ररूपिणी ॥ १ ॥
इत्यष्टौ शक्तयो देवि शत्रुपक्षे नियोजिताः ।
धारयेत् कण्ठदेशे च सर्वशत्रुविनाशिनी ॥ २ ॥
॥ अष्ट शक्ति मन्त्रः ॥
१. भ्रामिणी मंत्र
२. स्तम्भिनी मंत्र
३. क्षोभिणी मंत्र
४. मोहिनी मंत्र
५. संहारिणी मंत्र
६. द्राविणी मंत्र
७. जृम्भिणी मंत्र
८. रौद्री मंत्र
॥ फलश्रुतिः ॥
धारिता साधकेन्द्रेण सर्वान् दुष्टान् विनाशयेत् ॥ ४ ॥
त्रिसन्ध्यमेकसन्ध्यं वा यः पठेत् स्थिरमानसः ।
न तस्य दुर्लभं लोके कल्पवृक्ष इव स्थितः ॥ ५ ॥
यं यं स्पृशति हस्तेन यं यं पश्यति चक्षुषा ।
स एव दासतां याति सारात्सारामिमं मनुम् ॥ ६ ॥
॥ इति श्रीरुद्रयामले शिवपार्वतिसंवादे श्री बगला प्रत्यङ्गिरा कवचम् सम्पूर्णम् ॥
॥ ॐ ॥
॥ पाठ के लाभ — धार्मिक मान्यताएँ ॥
- आध्यात्मिक संरक्षण: भक्त इस स्तोत्र को देवी की आराधना और आंतरिक साहस के लिए पढ़ सकते हैं।
- संकट में धैर्य: नियमित प्रार्थना कुछ लोगों को मानसिक स्थिरता और आशा प्रदान कर सकती है।
- एकाग्रता: शांत वातावरण में पाठ करने से साधक को ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिल सकती है।
- सदाचार: पूजा के साथ सत्य, संयम और न्यायपूर्ण आचरण का पालन करना महत्वपूर्ण है।
शिव शक्ति सेवा धाम
तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र, दिल्ली
गुरु-दीक्षा, साधना संबंधी मार्गदर्शन तथा मंत्र-संस्कारित साधना सामग्री के विषय में जानकारी के लिए संपर्क करें।
पता: शिव शक्ति सेवा धाम, तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र, दिल्ली
व्हाट्सऐप संपर्क
॥ जय माँ भगवती ॥
॥ हर हर महादेव ॥
॥ आवश्यक सूचना ॥
॥ हर हर महादेव ॥
॥ ॐ ॥