॥ श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली ॥
श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली माँ श्री प्रत्यङ्गिरा देवी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। हिन्दू शाक्त एवं तांत्रिक परंपराओं में माँ प्रत्यङ्गिरा को उग्र शक्ति, आध्यात्मिक रक्षा और दुष्ट प्रवृत्तियों के शमन से संबंधित देवी के रूप में पूजा जाता है।
माँ प्रत्यङ्गिरा का स्वरूप सिंहमुखी बताया जाता है। कुछ परंपराओं में उनका संबंध भगवान नरसिंह की शक्ति से जोड़ा जाता है, जबकि अन्य परंपराओं में उन्हें भद्रकाली तथा अथर्वण परंपरा से संबंधित देवी के रूप में वर्णित किया गया है।
उनके उग्र स्वरूप में शक्ति, साहस, निर्भयता और अधर्म के प्रतिरोध का प्रतीकात्मक भाव देखा जाता है। विभिन्न स्तोत्रों एवं नामावलियों में उनके अनेक नाम मिलते हैं, जिनमें उनकी रक्षात्मक शक्ति, तेज और दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है।
ध्यान दें: प्रत्यङ्गिरा देवी के स्वरूप, उत्पत्ति और भगवान नरसिंह से संबंध के विषय में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में भिन्न वर्णन मिल सकते हैं।
॥ प्रमुख नामों के अर्थ (Key Names Explained) ॥
नीचे दिए गए नामों के अर्थ उनके पारंपरिक धार्मिक भाव के अनुसार प्रस्तुत हैं। नामों की वास्तविक वर्तनी और क्रम संबंधित प्रामाणिक नामावली से मिलान करके ही निश्चित किए जाने चाहिए।
प्रत्यङ्गिरा — देवी का प्रमुख नाम, जो उनकी विशिष्ट दिव्य शक्ति का परिचायक है।
आभिचारिकहोमाग्निसमुत्थिता — अभिचार-संबंधी हवन-अग्नि से प्रकट होने वाली देवी के रूप में वर्णित।
सिंहमुखा — सिंह के मुख वाली देवी।
परमन्त्रविदारिणी — परंपरागत अर्थ में प्रतिकूल मंत्र-प्रयोगों को निष्फल करने वाली।
परयन्त्रविनाशिनी — प्रतिकूल यंत्र-प्रयोगों के निवारण से संबंधित देवी-स्वरूप।
परकृत्याविध्वंसिनी — कृत्या अथवा अभिचार के निवारण से संबंधित देवी।
शत्रुभयङ्करी — शत्रुओं के लिए भयकारी मानी जाने वाली।
शत्रुमूर्धस्फोटना — उग्र शक्ति का प्रतीकात्मक वर्णन करने वाला नाम।
नारसिंही — नरसिंह से संबंधित शक्ति-स्वरूप।
मृत्युमृत्युस्वरूपिणी — मृत्यु पर विजय और संकटों से रक्षा के भाव से संबंधित।
दुष्टप्रयोगनिवारिणी — दुष्ट या प्रतिकूल प्रयोगों का निवारण करने वाली।
सर्वशापविमोचनी — शाप से मुक्ति प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजित।
अथर्वणवेदभासिता — अथर्वण परंपरा से संबंधित तेजस्वी देवी।
प्रत्यङ्गिरा भद्रकाली — प्रत्यङ्गिरा और भद्रकाली के स्वरूपों के संबंध को व्यक्त करने वाला नाम।
नोट: ये अर्थ संक्षिप्त व्याख्याएँ हैं। पूर्ण 108 नामों और उनके क्रम की पुष्टि के लिए संबंधित प्रामाणिक नामावली का पाठ आवश्यक है।
॥ पाठ के पारंपरिक लाभ (Traditional Significance) ॥
श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार, माँ प्रत्यङ्गिरा की नामावली का श्रद्धापूर्वक पाठ आध्यात्मिक बल, साहस, आत्मविश्वास और मन की स्थिरता के लिए किया जाता है।
आध्यात्मिक रक्षा: देवी के रक्षात्मक स्वरूप का स्मरण।
भय से मुक्ति: कठिन परिस्थितियों में साहस और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा।
नकारात्मक विचारों से संघर्ष: मन को सकारात्मक दिशा में लगाने का आध्यात्मिक अभ्यास।
संकटों में धैर्य: विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक संबल।
शांति एवं एकाग्रता: नियमित प्रार्थना और नाम-स्मरण से मन को स्थिर करने का प्रयास।
न्याय एवं सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा: कठिन विवादों में संयम, सत्य और उचित प्रक्रिया का पालन करने का संकल्प।
ग्रह-दोष संबंधी धार्मिक आस्था: कुछ परंपराओं में देवी-उपासना को ग्रह-संबंधी शांति के धार्मिक उपायों में शामिल किया जाता है।
महत्वपूर्ण: ये धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं। पाठ से किसी विशेष समस्या का समाधान, शत्रु पर विजय, न्यायालय में सफलता या अलौकिक सुरक्षा निश्चित होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
॥ पाठ-विधि (Ritual Method) ॥
१. स्थान की तैयारी
स्वच्छ एवं शांत स्थान पर बैठें। पूजा-स्थल को अपनी परंपरा के अनुसार व्यवस्थित करें।
२. स्नान एवं स्वच्छ वस्त्र
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत रखें।
३. दीप एवं पुष्प
अपनी परंपरा के अनुसार दीपक और पुष्प अर्पित करें। किसी विशेष सामग्री का उपयोग अनिवार्य मानने के बजाय अपनी श्रद्धा और उपलब्धता के अनुसार पूजा करें।
४. संकल्प
पाठ से पहले मन में प्रार्थना करें कि आपको सद्बुद्धि, साहस, आत्मसंयम और उचित मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त हो।
५. नामावली का पाठ
श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली का पाठ श्रद्धा और एकाग्रता से करें। यदि किसी नाम का उच्चारण स्पष्ट न हो, तो प्रामाणिक पाठ से उसका मिलान करें।
६. समापन प्रार्थना
पाठ के अंत में देवी से शांति, कल्याण और सभी के मंगल की प्रार्थना करें।
विशेष सावधानी
प्रत्यङ्गिरा उपासना की कुछ तांत्रिक परंपराओं में विशेष नियम एवं दीक्षा का विधान बताया जाता है। ऐसी विशिष्ट साधनाएँ योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करें। सामान्य नाम-स्मरण को उग्र तांत्रिक अनुष्ठानों से अलग समझना चाहिए।
॥ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) ॥
१. श्री प्रत्यङ्गिरा देवी कौन हैं?
माँ प्रत्यङ्गिरा को हिन्दू शाक्त एवं तांत्रिक परंपराओं में उग्र शक्ति और आध्यात्मिक रक्षा से संबंधित देवी के रूप में पूजा जाता है। उनका स्वरूप प्रायः सिंहमुखी बताया जाता है।
२. श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली क्या है?
यह देवी के 108 नामों का संग्रह है। भक्त इन नामों का पाठ देवी के स्मरण, स्तुति और आध्यात्मिक साधना के लिए करते हैं।
३. प्रत्यङ्गिरा देवी और भगवान नरसिंह का क्या संबंध है?
कुछ धार्मिक परंपराओं में माँ प्रत्यङ्गिरा को भगवान नरसिंह की शक्ति अथवा नरसिंह से संबंधित दिव्य शक्ति के रूप में वर्णित किया जाता है। इस संबंध की व्याख्या परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
४. ‘सिंहमुखा’ नाम का क्या अर्थ है?
‘सिंहमुखा’ का सामान्य अर्थ है—सिंह के मुख वाली। यह देवी के उग्र, तेजस्वी और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करता है।
५. ‘परमन्त्रविदारिणी’ का क्या अर्थ है?
इस नाम का पारंपरिक भाव प्रतिकूल मंत्र-प्रयोगों को निष्फल करने वाली दिव्य शक्ति से संबंधित है। इसे धार्मिक मान्यता के संदर्भ में समझना चाहिए।
६. ‘नारसिंही’ नाम का क्या अर्थ है?
‘नारसिंही’ नाम नरसिंह से संबंधित शक्ति अथवा स्वरूप का संकेत देता है।
७. क्या नामावली का पाठ करने के लिए दीक्षा आवश्यक है?
सामान्य नाम-स्मरण और विशिष्ट तांत्रिक साधना अलग-अलग विषय हैं। कुछ परंपराओं में विशेष साधनाओं के लिए गुरु-दीक्षा आवश्यक मानी जाती है। अपनी परंपरा के योग्य गुरु से मार्गदर्शन लेना उचित है।
८. नामावली का पाठ कब किया जा सकता है?
भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियमित पूजा के समय नामावली का पाठ कर सकते हैं। किसी विशेष तिथि या समय को अनिवार्य बताने से पहले प्रामाणिक परंपरागत स्रोत देखना चाहिए।
९. प्रामाणिक 108 नाम कहाँ से प्राप्त करें?
नामों की सही वर्तनी, क्रम और अर्थ के लिए किसी विश्वसनीय धार्मिक ग्रंथ, प्रकाशित स्तोत्र-संग्रह या संबंधित परंपरा के प्रामाणिक स्रोत से मिलान करें।माँ श्री प्रत्यङ्गिरा की उपासना श्रद्धा, आत्मसंयम, साहस और सद्बुद्धि की भावना से करें। नामावली का पाठ करते समय शुद्ध उच्चारण, प्रामाणिक पाठ और सभी के कल्याण की भावना को महत्त्व दें।
॥ ॐ ॥
श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली
॥ श्री प्रत्यङ्गिरा देवी के १०८ पवित्र नाम ॥
॥ श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली ॥
ॐ प्रत्यङ्गिरायै नमः ।
॥ प्रथम खण्ड — १ से ९ ॥
ॐ ओङ्काररूपिण्यै नमः ।
ॐ क्षं ह्रां बीजप्रेरितायै नमः ।
ॐ विश्वरूपायै नमः ।
ॐ विरूपाक्षप्रियायै नमः ।
ॐ ऋङ्मन्त्रपारायणप्रीतायै नमः ।
ॐ कपालमालालङ्कृतायै नमः ।
ॐ नागेन्द्रभूषणायै नमः ।
ॐ नागयज्ञोपवीतधारिण्यै नमः ॥ ९ ॥
॥ द्वितीय खण्ड — १० से १८ ॥
ॐ कुञ्चितकेशिन्यै नमः ।
ॐ कपालखट्वाङ्गधारिण्यै नमः ।
ॐ शूलिन्यै नमः ।
ॐ रक्तनेत्रज्वालिन्यै नमः ।
ॐ चतुर्भुजायै नमः ।
ॐ डमरुकधारिण्यै नमः ।
ॐ ज्वालाकरालवदनायै नमः ।
ॐ ज्वालाजिह्वायै नमः ।
ॐ करालदंष्ट्रायै नमः ॥ १८ ॥
॥ तृतीय खण्ड — १९ से २७ ॥
ॐ आभिचारिकहोमाग्निसमुत्थितायै नमः ।
ॐ सिंहमुखायै नमः ।
ॐ महिषासुरमर्दिन्यै नमः ।
ॐ धूम्रलोचनायै नमः ।
ॐ कृष्णाङ्गायै नमः ।
ॐ प्रेतवाहनायै नमः ।
ॐ प्रेतासनायै नमः ।
ॐ प्रेतभोजिन्यै नमः ।
ॐ रक्तप्रियायै नमः ॥ २७ ॥
॥ चतुर्थ खण्ड — २८ से ३६ ॥
ॐ शाकमांसप्रियायै नमः ।
ॐ अष्टभैरवसेवितायै नमः ।
ॐ डाकिनीपरिसेवितायै नमः ।
ॐ मधुपानप्रियायै नमः ।
ॐ बलिप्रियायै नमः ।
ॐ सिंहवाहनायै नमः ।
ॐ सिंहगर्जिन्यै नमः ।
ॐ परमन्त्रविदारिण्यै नमः ।
ॐ परयन्त्रविनाशिन्यै नमः ॥ ३६ ॥
॥ पञ्चम खण्ड — ३७ से ४५ ॥
ॐ परकृत्याविध्वंसिन्यै नमः ।
ॐ गुह्यविद्यायै नमः ।
ॐ सिद्धविद्यायै नमः ।
ॐ योनिरूपिण्यै नमः ।
ॐ नवयोनिचक्रात्मिकायै नमः ।
ॐ वीररूपायै नमः ।
ॐ दुर्गारूपायै नमः ।
ॐ महाभीषणायै नमः ।
ॐ घोररूपिण्यै नमः ॥ ४५ ॥
॥ षष्ठ खण्ड — ४६ से ५४ ॥
ॐ महाक्रूरायै नमः ।
ॐ हिमाचलनिवासिन्यै नमः ।
ॐ वराभयप्रदायै नमः ।
ॐ विषुरूपायै नमः ।
ॐ शत्रुभयङ्कर्यै नमः ।
ॐ विद्युद्घातायै नमः ।
ॐ शत्रुमूर्धस्फोटनायै नमः ।
ॐ विधूमाग्निसमप्रभायै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ॥ ५४ ॥
॥ सप्तम खण्ड — ५५ से ६३ ॥
ॐ माहेश्वरप्रियायै नमः ।
ॐ शत्रुकार्यहानिकर्यै नमः ।
ॐ ममकार्यसिद्धिकर्यै नमः ।
ॐ शत्रूणामुद्योगविघ्नकर्यै नमः ।
ॐ मम सर्वोद्योगवश्यकर्यै नमः ।
ॐ शत्रुपशुपुत्रविनाशिन्यै नमः ।
ॐ त्रिनेत्रायै नमः ।
ॐ सुरासुरनिषेवितायै नमः ।
ॐ तीव्रसाधकपूजितायै नमः ॥ ६३ ॥
॥ अष्टम खण्ड — ६४ से ७२ ॥
ॐ नवग्रहशासिन्यै नमः ।
ॐ आश्रितकल्पवृक्षायै नमः ।
ॐ भक्तप्रसन्नरूपिण्यै नमः ।
ॐ अनन्तकल्याणगुणाभिरामायै नमः ।
ॐ कामरूपिण्यै नमः ।
ॐ क्रोधरूपिण्यै नमः ।
ॐ मोहरूपिण्यै नमः ।
ॐ मदरूपिण्यै नमः ।
ॐ उग्रायै नमः ॥ ७२ ॥
॥ नवम खण्ड — ७३ से ८१ ॥
ॐ नारसिंह्यै नमः ।
ॐ मृत्युमृत्युस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ अणिमादिसिद्धिप्रदायै नमः ।
ॐ अन्तश्शत्रुविदारिण्यै नमः ।
ॐ सकलदुरितविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वोपद्रवनिवारिण्यै नमः ।
ॐ दुर्जनकालरात्र्यै नमः ।
ॐ महाप्राज्ञायै नमः ।
ॐ महाबलायै नमः ॥ ८१ ॥
॥ दशम खण्ड — ८२ से ९० ॥
ॐ कालीरूपिण्यै नमः ।
ॐ वज्राङ्गायै नमः ।
ॐ दुष्टप्रयोगनिवारिण्यै नमः ।
ॐ सर्वशापविमोचन्यै नमः ।
ॐ निग्रहानुग्रहक्रियानिपुणायै नमः ।
ॐ इच्छाज्ञानक्रियाशक्तिरूपिण्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः ।
ॐ हिरण्यसटाच्छटायै नमः ।
ॐ इन्द्रादिदिक्पालकसेवितायै नमः ॥ ९० ॥
॥ एकादश खण्ड — ९१ से ९९ ॥
ॐ परप्रयोगप्रत्यक्प्रचोदिन्यै नमः ।
ॐ चराचराकर्षिण्यै नमः ।
ॐ खड्गमालारूपिण्यै नमः ।
ॐ नृसिंहसालग्रामनिवासिन्यै नमः ।
ॐ भक्तशत्रुभक्षिण्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मास्त्रस्वरूपायै नमः ।
ॐ सहस्रारशक्त्यै नमः ।
ॐ सिद्धेश्वर्यै नमः ।
ॐ योगीश्वर्यै नमः ॥ ९९ ॥
॥ द्वादश खण्ड — १०० से १०८ ॥
ॐ आत्मरक्षणशक्तिदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वविघ्नविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वान्तकनिवारिण्यै नमः ।
ॐ सर्वदुष्टप्रदुष्टशिरश्छेदिन्यै नमः ।
ॐ अथर्वणवेदभासितायै नमः ।
ॐ श्मशानवासिन्यै नमः ।
ॐ भूतभेतालसेवितायै नमः ।
ॐ सिद्धमण्डलपूजितायै नमः ।
ॐ प्रत्यङ्गिरा भद्रकाली देवतायै नमः ॥ १०८ ॥
॥ फल-समर्पण एवं समापन ॥
॥ इति श्री प्रत्यङ्गिरा अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
ॐ
॥ जय माँ प्रत्यङ्गिरा ॥
गुरु-दीक्षा एवं साधना संबंधी मार्गदर्शन
शिव शक्ति सेवा धाम
तंत्रशक्ति पीठ एवं साधना केंद्र, दिल्ली
व्हाट्सऐप संपर्क: 7042510765
धार्मिक एवं साधना संबंधी मार्गदर्शन के लिए संपर्क करें। विशिष्ट तांत्रिक साधनाओं के नियम अपनी परंपरा के योग्य गुरु से समझें।
